Agriculture(कृषि)

प्रशांत फाउंडेशन ने अपने उद्देश्यों में कृषि को भी प्राथमिकता दी है जिसका प्रमुख कारण है कृषको का सही ढंग से कृषि न करना व कृषि के प्रति लगाव कम होना । प्रशांत फाउंडेशन कृषि को व्यसायिक आधार मानता है इसलिए इस व्यसायिक आधार को मजबूत करने के लिए , समाज में कृषको को सम्मान दिलाने के लिए, कृषि की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सदैव प्रयत्नशील है । प्रशांत फाउंडेशन नीचे कुछ तथ्यों को आप सभी के समक्ष रख रहा है जिससे आप समझ पाएंगे कि कैसे प्रशांत फाउंडेशन कृषक समाज को उन्नति के पथ पर ले जाने को प्रतिबद्ध है।

  • एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना (integrated farming system)-प्रशांत फाउंडेशन आज के समय में कृषि को लेकर बहुत ही चिंतित है , क्योंकि आज के समय में कृषक पर्याप्त लागत के अनुसार उत्पादन नही कर पा रहा है जिससे उसे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है इस कारण कृषक आधारभूत कृषि व्यसाय को छोड़ कर किसी दूसरे व्यसाय की तलाश कर रहा है। प्रशांत फाउंडेशन समाज में कृषि को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाने की सलाह देगा । और कृषको को प्रयोगात्मक तरीके से बतायेगा कि कैसे एकीकृत कृषि , कृषक की आय को बढ़ा सकती है। वास्तव में एकीकृत कृषि , कृषक के पूर्ण संशाधनों को उपयोग में लाने की प्रक्रिया है जिससे कृषक संपूर्ण संसाधनों को प्रयोग कर सके ।
  • जैविक खेती को बढ़ावा देना- आज के आधुनिक समय में हम रासायनिक खेती का प्रयोग तेजी से कर रहे है जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता क्षीण हो रही है जो कृषक की आय को कम उत्पादकता से प्रभावित करती है। इस समस्या को दूर करने के प्रयास से प्रशांत फाउंडेशन कृषक को प्राकृतिक जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करेगा , यहां पर प्राकृतिक से तात्पर्य है कि जिस उर्वरक का उत्पादन होगा वो प्राकृतिक क्रिया के फलस्वरूप होगा जिससे मिट्टी की उर्वरा तो बढ़ेगी इसके साथ साथ उत्पादन , आय एवं पर्यावरण पर भी अनुकूल प्रभाव देखने को मिलेंगे।
  • किसानों को सही मार्गदर्शन-आज के समय में किसान लागत मूल्य के हिसाब से उत्पादन करने में असमर्थ नजर आता है जिसका एक प्रमुख कारण कृषको को सही मार्गदर्शन न मिलना भी है जिस कारण कृषक किसी भी प्रकार के उर्वरको को अपनाकर खेती की उर्वरकता को नष्ट कर देता है , सही क्रम से खेती को अज्ञान वश नही अपनाता है जिससे कम आय उसे प्राप्त होती है । प्रशांत फाउंडेशन इन सभी बारीकियों को ध्यान में रख कर कृषक को कृषि वैज्ञानिकों के संरक्षण में सही व उच्च कोटि का मार्गदर्शन देगा जिससे हमारे अन्नदाता एक सुखी जीवन- यापन कर सके।

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